अरे, सब लोग हमें बधाई दो रे!

तीन दिन हम अपने इस प्रिय चिट्ठाजगत से दूर रहे । इस बीच अपने चिटठे पर की गयी टिप्पणियों को देखने की भी फुर्सत नहीं मिली ।  हम अपने नये खिलौने के साथ इतना व्यस्त थे कि आभास ही नही हुआ कब तीन दिन ग़ुज़र गये। इससे पहले कि अटकलों का दौर शुरू हो, हम ही बताये देते हैं कि खबर क्या है । नाथ ने हमें एक सिन्थेसाइज़र तोहफ़े में दिया है । वैसे बजाने के नाम पर हम सिर्फ़ ताली बजा पाते हैं और फ़िलहाल हमारे हाथ मे सिन्थेसाइज़र ऐसा दीख पड़ता है जैसे बन्दर के हाथ में उस्तरा ।

पर हमारे पति निहायत आशावान जीव हैं । आशावान होने के साथ शार्तिया चतुर भी हैं । जो चीज़ खुद को भाये, भेंट के रूप में हमें थमा देते हैं । या फिर ऐसे समझ लीजिये कि हमारा तोहफ़ा वह होता है जिसका पूरा इस्तेमाल श्रीमान जी भी कर सकें । “ये लो तुम्हारा गिफ़्ट” । हो गया एक पंथ दो काज ।  एक दिन सुबह से गाना गाया जा रहा था कि तुम्हारे लिये एक सरप्राइज़ है । अब ये चोरी से क्या ले आये हैं, कोई अँगूठी, या कोई साड़ी या फिर तैलचित्र बनाने का सामान…या…। ऐसे क़यास लगाते, मन ही मन खुश होते, शाम हो गयी । अब कोई सरप्राइज़ की बात करे अपनी पत्नी से तो ऐसी जिज्ञासा होना स्वाभाविक है । शाम को एक डब्बा पेश कर दिया हमारे सामने । हमने खोला …ली-कूपर की पुरुषों की सैंडल का जोड़ा हमें मुँह चिढ़ा रहा था । “तुम्हारे बिना अपने लिये कभी कुछ नहीं खरीदता ना! आज अकेले खरीदा…डेढ़ हज़ार की चप्पल । कैसी लगी? है ना सरप्राइज़?” । हमने सर धुन लिया । देवर हँसी के मारे लोट-पोट हो गये ।  तबसे अगर बता के मेरे लिए भले ही अपने मतलब की चीज़ ले आयें, मुझे शिकायत नहीं होती । सरप्राइज़ से तो अच्छा ही है । कम से कम मैं दिमाग़ को तकलीफ़ तो नहीं देती अटकलें लगाने की । डिजिटल कैमरा हो चाहे म्यूज़िक सिस्टम यहाँ तक कि कार भी इसी श्रेणी की भेंट है । और अब ये की-बोर्ड उसी श्रेणी का अगला हिस्सा है ।

संगीत से बड़ा प्रेम है स्वामी को । खुद तबला, ड्रम, ढोलक, नाल, काँगो-बाँगो जैसे वाद्य-यंत्र कुशलता से बजा लेते हैं । पर घर में कोई की-बोर्ड बजाने वाला प्राणी नहीं है तो उन्होंने हमें धर पकड़ा । सीखो अब । इस शनिवार विचार बना कि चलो आज तो की-बोर्ड खरीद ही लिया जाये । हमने चलने से पहले ही एलान कर दिया था कि मँहगे यंत्र में पैसे फँसाने का कोई मतलब नहीं । हमारा कोई भरोसा नहीं । अच्छा लगा तो ठीक पर अगर मन नहीं लगा तो फिर साक्षात ब्रह्मा जी भी हमें सीखने पर मजबूर नहीं कर सकते । बात अन्ततः यामाहा के सबसे सस्ते मॉडल पे तय हुई । जय गूगल देव की । खोज बीन के दो चार दुकानों के पते निकाले । उनसे बात की । हमने खुद को समझा लिया था कि बेटा ५-७ हज़ार का तो फटका पड़ा समझो । मार्केटिंग किसे कहते हैं उसका साक्षात नमूना अब देखा । एक दुकान से तीन बार फ़ोन आ चुका था । महोदय पढ़े-लिखे और संगीत की समझ रखने वाले जान पड़ते थे तो हम दोनों उन्हीं की दुकान पे चल पड़े । ‘हौज़खास विलेज’ में जब तक उनकी दुकान पर पहुँचें उनका फिर फ़ोन आ गया । “कहाँ हैं आप लोग, रस्ता तो आराम से मिल गया ना आपको”, “जी बस पहुँच गये, गाड़ी पार्क कर रहे हैं”, “जी अच्छा, पार्किंग के दाँयी ओर मैं नीली टी-शर्ट में खड़ा हूँ” । हम दोनों ने ही सोचा कि ये पहले इन्सान मिले जो स्वागत में बाहर ही आ खड़े हुये हैं । दुकान सामने ही दिख रही थी और दुकान से कुछ दूर पर नीली टी-शर्ट में एक सज्जन भी । मुस्कुरा के उन्होने स्वागत किया और अंदर की ओर चल पड़े । उनकी दुकान भीतर की ओर थी । अब हम समझे काहे बाहर खड़े थे । नहीं तो हम तो सीधे सामने की दुकान मे घुस लिये होते ।

दुकान मे जा बातचीत शुरू हुई ।
“आप आई-टी में हैं? ” सज्जन ने पूछा । आजकल वैसे भी हर तीसरा युवक इसी उद्यम में लगा हुआ है सो ये तुक्का प्रायः सही ही बैठता है।
“हाँ” ।
“कहाँ ?”
“ह्यूविट असोसिएट्स । ”
“किस डोमेन में काम है आपका ?” उन सज्जन का सामान्य ज्ञान काफ़ी विस्तृत प्रतीत हो रहा था मुझे, अपितु ये कहूँ कि था । उनसे १५ मिनट की बात में यह बात स्पष्ट हो गयी थी ।
“जी मैं अब डेवलपमेन्ट नहीं करता । मेरी टीम करती है । मैं प्रोजेक्ट लीडर हूँ ।”
“ओह, अच्छा अच्छा । तो आपको अपने लिये चहिये था की-बोर्ड ।”
“नहीं, मेरी वाइफ़ के लिये ।”
“असल में मुझे फ़ोन पे लगा था कि शायद किसी बच्चे के लिये लेना हो । आप लोअर मॉडल चाह रहे थे ना इसलिये। वैसे आप भी वर्क करती हैं?” सज्जन अब मुझसे मुख़ातिब थे ।
“जी करती थी । फ़िलहाल छोड़ दिया”
“ओह फिर तो आपके पास काफ़ी समय होता होगा घर पे । मैं कहूँगा आप लोग यामाहा, पी.एस.आर-२९५ ही लें । १४,००० का है मैं आपको १२,५०० में दे दूँगा” ।
“देखिये मुझे बजाना बिल्कुल नहीं आता और मुझे अभी ये भी पता नहीं कि मैं बजा भी पाऊँगी या नहीं । इसलिये हम लोअर मॉडल ही चाह रहे थे ।”
“अरे की-बोर्ड का सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि आप इसका वॉल्युम कन्ट्रोल कर सकते हैं । हारमोनियम हमेशा पूरे सुर में बजता है और पड़ोसी आपको दिन रात कोसते हैं । इसलिये सीखने के लिये भी ये बढ़िया है । अब देखिये ये खराब होने वाली चीज़ तो है नहीं । सालों ऐसी ही रहेगी । फिर इसके फ़ीचर्स भी बहुत हैं । और ये चीज़ें आप रोज़ तो अपग्रेड करते नहीं । आप लोग टेक्निकल हैं , यूटिलाइज़ कर सकते हैं । इसमें यू.एस.बी कनेक्टिविटी भी है । आप कम्प्यूटर से कनेक्ट कर सकते हैं ।………और ”

और भी बहुत कुछ । मैंने अमित कि ओर देखा । डोले हुए से मेरी ओर देख रहे थे । हमारे मुँह पर असमंजस मिश्रित आंशिक सहमति देख उन्होंने झट स्वीकृति कि मोहर लगा दी । हमारा खिलौना पैक हो गया, कवर के पैसे अलग लगे । ५०० के  २६ नोट एक झटके में हवा ।

घर आ के हमने पहली बार किसी की-बोर्ड को छू के देखा । दोनों हाथ उस पर ऐसे रखे जैसे यान्नी ने भी न रखे होंगे । बड़ा मज़ा आया । रात हो चुकी थी । थोड़ी  देर अमित ने अपने ज्ञान का प्रदर्शन किया बाकी समय हमने ‘टिंग-टुंग झम-झम झायँ-झाँय’ की । फिर सो गये । सुबह देखा तो मानसून दस्तक दे चुका था । झमाझम पानी बरस रहा था ।  तन और मन दोनो को ठन्ड्क मिली । नहीं तो कुछ दिनों से ऐसा लग रहा था कि भगवान हमें भूनने के पश्चात भाप में पका रहे हों ।  अब १५-२० दिनों की भारी उमस के बाद जा के भगवान मेहरबान हुए थे । हमें शक़ हुआ कि कहीं हम अनजाने में ‘मेघ मल्हार’ तो नहीं बजा गये ।

अब बात आयी सीखने की । आस पास कोई सिखाने वाला है नहीं, ये पहले ही पता किया जा चुका है सो अन्तर्जाल की शरण ली गयी ।  एक बढ़िया साइट  मिली । एक ही दिन में सरगम, फिर अलंकार और उसके बाद राग ‘यमन कल्याण’ पर जा पहुँचे । सोचा अमित को तो झटका ही लग जायेगा । रात को जब सुनाने बैठे तो सब गड्डम-गड्ड । मुँह लटक गया कि ये लो शुरुआत ही बुरी । पर पतिदेव ने फिर भी हौसला बढ़ाया । समझाया कि धीरज से काम लेने से ही सफलता हाथ लगेगी । फिर अभ्यास से क्या नही सीखा जा सकता । बात समझ आ गयी । सो पिछले दो दिन एक ही चीज़ दुहराते रहे । अब जा के ठीक- ठीक हाथ बैठा है । एक दो मित्र हैं जो इस कला के अच्छे जानकार हैं सो वह भी मदद करने को तैयार हैं । पतिदेव खुश हैं । हमें भी धुन लग गयी है । आप सब का आशीर्वाद और शुभकामनायें साथ रहीं तो आशा है  कि सीख भी जायेंगे ।

तो बस फ़िलहाल हमारी गाड़ी चल पड़ी है ।  आप सब दुआ कीजिये कि कहीं थोड़ी दूर जा के रुक न जाये ।

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Published in: on जुलाई 14, 2006 at 2:50 पूर्वाह्न  Comments (25)  

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25 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. निधी जी सोच के लिखें, पहले ही परिच्छेद में खिलोनें का नाम लिखा तो मैं तो कुछ और ही समझ बैठा था 🙂

  2. आशीष भाई पता है सबकी बुद्धी कहाँ जा टिकेगी । पर मैनें शंका का निवारण तो कर ही दिया न । और वैसे भी एक नारी की संतान पाने की खुशी तीन दिन में सिमट जाय और उसे छोड़ लिखने की फुर्सत मिल जाय, भला ऐसा संभव है क्या ?? 🙂

  3. अच्छा लगा आपको फिर से लिखता देख.

    आप जल्द सी सिख जाएँ और एक अच्छी सी धून पोडकास्ट करें.

    अब मैरे नाम से गफलत नही होगी ना, इसबार इमेल भी सही लिखा है? 😀

  4. आपकी गाडी हमेशा चलती रहे 😉 हमारी तरफ से बधाई

  5. पहले-पहल मैने भी सोचा कि नन्हे खिलौने से इन्हे इतनी जल्दी फुर्सत कैसे मिल गई? और बधाई देने पहुंच गया.
    चलिए हाथ आज़माईये नये खिलौने पर और कोई अच्छी सी धुन रेकोर्ड कर नेट पर रखिये.

  6. संगीत सीखने के लिये मानोशी दी से संपर्क साधा जाये !

    संगीत सिखने की कोशीश के लिये शुभकामनाय़ें। वैसे मै ये कोशीश हर साल करता हू और छोड देता हूं 😦
    मेरे दोस्त कहते है “तु बुरा नही गाता है, बहुत ही बुरा गाता है !”

    वैसे आज भी आपके इस चिठ्ठे मुझे कुछ नये टिप्स दिये है 🙂

  7. बधाई – आप बहुत अच्छा लिखती हैं।
    शायद वाक्य के अन्त में और कड़ी पायी के बीच में जगह न छोड़ें तो ठीक रहे।

  8. निधि जी
    बधाई, आशा करता हुँ कुछ ही दिनों में आपकी बनाई धुन सुनने को मिलेगी।

  9. सभी चिट्ठाकार बंधु आपके बाजे का गाना सुनने को कान लगाये बैठे हैं. जल्दी से कुछ बना के भेज दीजिये. वैसे कुछ लोकप्रिय धुन ही भेजियेगा, नहीं तो हमको कैसे पता चलेगा की आप सही बजा रहीं हैं कि बेसुरा!

  10. Hi Nidhi,

    Congratulations for the new instrument. Hope you would become a master of it very soon.

  11. पंकज जी, शुएब जी, संजय जी, उनमुक्त जी, सागर जी,अशीष जी, अमित और प्रशान्त आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद । पंकज जी, भाई लोगों को एक बार पहचान लिया अब नहीं भूलूँगी, आप जो मन आये सो ई-मेल लिखिये :)। अशीष एक नये जानकार के बारे में बताने के लिये धन्यवाद । मैं अवश्य ही उनसे बात करूँगी । मेरे दोस्त मेरे गाने के बारे में ऐसा कुछ नहीं कहते इसलिये अभी हौसले बुलंद हैं । वैसे मैं गाने से अधिक बजाने पर ध्यान दे रही हूँ । उनमुक्त मुझे आपकी बात समझ नहीं आयि 😦 । आप सबकी शुभकामनाओं के लिये एक बार फिर धन्यवाद ।

  12. खूब, बहुत खूब, मार्केटिंग के चक्कर में पड़ तीन गुना महंगा कीबोर्ड खरीद लाए, वाह आप जैसे ग्राहक को तो हर कोई पसंद करेगा निधि जी!! 😀

    मेरी भी शुभकामनाएँ टिका लीजिए, और मैं भी पंकज भाई से सहमत हूँ, महंगे कीबोर्ड और usb कनेक्टिविटी का पूर्ण लाभ उठाईये और जल्द ही एक धुन सुनाईये। 🙂

  13. बाजा खरीदने,बजने और बजाना शुरू करने की बधाई।आगे के लिये सबको
    शुभकामनायें।

  14. क्या बात है…कुछ धुने‍ इधर भी अपलोड करे‍। और हमने सुना है कि आप गाती भी बहुत अच्छा है‍….

  15. हेलो,

    मेरा पहला पोस्ट हिन्दी में 🙂 आशीष की बात सुन कर मुझे अपने एक दोस्त की बात याद आ गयी जो मेरे गाने पर कहता था कि मेरी आवाज़ में बहुत दर्द है सुनने वाले की अवाज़ में दर्द पैदा कर देती है।

    संगीत सुनना और उसमें महारत हासिल करना दो एक्दम अलग अलग चीज़ें हैं। बचपन में बहुत fight मारी थी पर फिर समझ आ गया कि अपने बस की बात नही है। थोडा बहुत गिटार पर हाथ साधा था सो अब वो भी इतिहास हो गया है। बहुत बचपन में माँ बाप ने तबला सिखाने का भरसक प्र्यत्न किया पर वो भी कामयाब न हो सका। मुझे तो ज़्यादा याद नही है पर बडे लोग बताते हैं कि तीन ताल बजाने लगा था पर फिर रुचि का अभाव झलकने लगा और हम अपने पहले प्यार किताबों की तरफ पूरी तन्मयता के साथ बढ गये।
    जो थोडा बहुत समझ आया उन दोस्तों को देख कर जिन्होने इस कला में महारथ हासिल करी है तो perseverance is the name of the game। करत करत अभ्यास के जडमति होत सुजान!!!

    सौरभ

  16. अरे पिछली पोस्ट में थोडी गड्बड हो गयी। मेरे दोस्त के मुताबिक मेरी अवाज़ का दर्द सुनने वाले की अवाज़ में नहीं उनके कानॊं में दर्द पैदा कर देता था 😦

    सौरभ

  17. […] कुछ खास नहीं पर जीतू हड़बडा़कर अपने को संभालते हुये बोले-क्या आपका नाम निधि है ? इस तरह भेष बदलकर क्यों आयी हैं ब्लागर मीट में। ये तो अच्छी बात नहीं है। बता देना था हम साथ ले आते आपको बाजे सहित। […]

  18. काफी अच्छा लिखती हैं आप 🙂

    बधाई सिन्थेसाइज़र पाने के लिये और शुभकामनायें भी| शीघ्र सीखिये और कोई धुन ब्लाग मे पोस्ट जल्द ही पोस्ट कर दिजिये|

  19. निधि जी,
    सिन्थेसाइज़र तो आपने ले ही लिया,थोडे दिनों के बाद आप उसकी मास्टर भी हो जायेगीं, जब आपको की आवशयकता हो तो बन्दे को याद कर लें,अब किलीनिक के अलावा समय मिला तो हाजिर हो जाऊगां ,एक बार फ़िर बाजे की मुबारक बाद्।

  20. माफ़ कीजयेगा,की के पहले assistant लगाना भूल गया,लेकिन Leave a Comment में एक edit option भी रख दीजिये।
    प्रभत

  21. हंसते हंसते बुरा हाल हो गया। मेघ मलहार, टिंग टुंग झांय झांय ने पेट में बल डाल दिए। मैं भी इन वाद्यों को जानता हूँ, इसलिए आपकी बात समझ सकता हूँ। आशा है कि 13000 का निवेश आप के काम आएगा।

  22. आप सभी का आपकी शुभकामनाओं और टिप्पणियों के लिये बहुत बहुत धन्यवाद । 🙂

  23. विराम या खड़ी पायी का चिन्ह जो कि यह है । को देखें कि मेरी, सागर जी और अनूप शुक्ला जी की टिप्पणी में कहां लगा है और आपने कहां लगाया है। माफी चहूंगा कि पहली बार टिप्पणी करते समय खड़ी को कड़ी लिख गया।

  24. जब अनजाने में ‘मेघ मल्हार’ बज जाता है और मेघ घुमड़ आते हैं तो सीखने के बाद क्या होगा . आप जल्दी सीखें और कुछ बढिया लोक गीत और उत्तर भारत के संस्कार गीत आपसे सुनने का सौभाग्य मिले यही कामना है .

  25. […] याद आया ना! चलिये मैं ही बता देता हूं यह पोस्ट हम सबकी प्रिय निधि श्रीवास्तव ने लिखी […]


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